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Prabhu tu Muskuraye, Pili Pili Sarsho



पिली पिली शरषो

Pili Pili Sarsho
Prabhu tu Muskuraye

पिली पिली शरषो जब खिले हां खेतो में

ऐसा लागे प्रभु तु मुस्कुराए

निले निले अंबर के तले जो बैठु तो

बाहें फैलाये जैसे तु बुलाये

पिली पिली शरषो जब खिले हां खेतो में

ऐसा लागे प्रभु तु मुस्कुराए

निले निले अंबर के तले जो बैठु तो

बाहें फैलाये जैसे तु बुलाये


तु काहाँ नहि है मेरे प्रभु तु काहाँ नहि है मेरे प्रभु 

फिर क्यों ये मनवा तुझे ढूँढ न पाए

पिली पिली शरषो जब खिले हां खेतो में

ऐसा लागे प्रभु तु मुस्कुराए


तुने रची है ये सुन्दर सृष्टी सब पर बराबर है तेरी दृष्टी

तुने रची है ये सुन्दर सृष्टी सब पर बराबर है तेरी दृष्टी

जो रोते हुए को हासाए भटके को राह दिखाए

वही तेरे दिल में अपनी जगह बनाए

पिली पिली शरषो जब खिले हां खेतो में

ऐसा लागे प्रभु तु मुस्कुराए


सुख दुःख तो जीवन की है एक लड़ी पथ पर हो कांटे या फुल की झड़ी

सुख दुःख तो जीवन की है एक लड़ी पथ पर हो कांटे या फुल की झड़ी

दुःख में न तु घबराना सुख में भी न इतराना

प्रभु गुन राहे तेरा कला बना

पिली पिली शरषो जब खिले हां खेतो में

ऐसा लागे प्रभु तु मुस्कुराए


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Credited to:-

Singer- Jyoti Sahoo

Lyrics - Ashok Gupta

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