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K85 Kahan Rahte Ho कहाँ रहते हो

 K85 Kahan Rahte Ho कहाँ रहते हो

कहाँ रहते हो प्रभु कहाँ रहते हो ये तुम बताओ-२

तुम्हें ढुवँ कहाँ तुम्हें खोजूं कहाँ (२) अधूरा मैं तेरे बिना

कहाँ रहते हो प्रभु कहाँ रहते हो ये तुम बताओ

१. चलता रहा हूँ मैं तेरी राहों पर जिसको तू एक दिन चुना था-२

कदम कदम पे मुझे लगता है ऐसा-२

ये काँटों भरी डगर है-२

२. विश्वास मेरा जो मजबूत नहीं है मन में अंधेरा घना है-२

फिर भी प्रभु मैं बुलाता हूँ दिल में-२

बिन तेरे जाऊँ कहाँ -२

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