Skip to main content

K57 Jab Parmeshwar Jage जब परमेश्वर जागे

 K57 Jab Parmeshwar Jage जब परमेश्वर जागे

जब परमेश्वर जागे-२

उसके दुश्मन इधर-उधर तब तितर बितर हो भागे

जो उससे नफरत करते हैं ठहर न पाये आगे

१. हे प्रभु तू जब प्रजा जनों का अगुवा बन निकला था

उजड़े हुए मरुस्थल में से बढ़ता हुआ चला था

काँप उठी थी तब यह धरती और गगन पिघला था

सीयोन स्वामी इसरायल के परमेश्वर के आगे

२. अपनी दांय-भाग धरती पर पानी खूब गिराया

प्यासी तरसी हुई धरा पर नव जीवन बरसाया

तेरे प्रजा जनों ने स्वामी खुद को वहीं बसाया

उस त्राता को सदा उसी से देता है बिन माँगे

Comments