R2 जग पर छाकर (उत्पत्ति १: १-२: २) Jag Par Chhakar
जग पर छा कर प्रभुका आत्मा
पृथ्वी सारी नई बनाता, हर्ष मनायें
१. उसे प्रभु का धार्मिकता वचन सच्चा और न्याय है उसके प्रिय समस्त है कार्य विश्वसनीय है
पृथ्वी उसके प्रेम से भरपूर है
२. उसके शब्द मात्र से आकाश बन गया
और उसके श्वास मात्र से समस्त तारा गण
वह समुद्र का पानी इकट्ठा करता है
और महासागर की गहराइयों को संचित कर लेता है
३. हम प्रभु की राह देखते रहते हैं
वही हमारा सहायक और रक्षक है
हे प्रभु! तुझ पर हमारा भरोसा है
तेरा प्रेम हमपर बना रहे
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