K33 ओ क्या दूँगा मैं
ओ क्या दूँगा मैं येसु को, येसु को
इतने भारी दानों के लिये
१. दूंगा मैं जीवन-प्राण येसु को दूंगा मैं हृदय प्राण येसु को
क्योंकि वह बनाता है मन्दिर मेरे, जैसे अयोग्य हृदय को
२. जीऊँगा मैं जीवन भर येसु हित, जीऊँगा मैं प्रति क्षण येसु हित
क्योंकि वह मरा है मेरे हित, जीवन देने को ही मेरे हित
३. ढोऊँगा मैं अपना क्रूस प्रतिदिन, होऊँगा मैं येसु लायक प्रति दिन
इस प्रकार जी करके प्रतिदिन, उसकी गोद प्राण-त्याग दूंगा एक दिन
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