J5 पिता हमारे
पिता हमारे तू जो करता , स्वर्गधाम में वास
पावन तेरा नाम सदा हो आवे तेरा राज
स्वर्ग समान हो तेरी इच्छा धरती तल पर पूरण
हरदिन का आहार हमारा करदे आज प्रदान
और हमारे अपराधों को क्षमादान कर नाथ
ज्यों अपने अपराधी जन को हम करते हैं माफ
न परीक्षा ले हमारी , किन्तु बुराई से बचा
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