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H46 Arpan Karte Hain Prabhu अर्पण करते हैं प्रभु


H46 Arpan Karte Hain Prabhu अर्पण करते हैं प्रभु


   अर्पण करते हैं प्रभु यह भेंट तुझे हम लाते हैं।
   ग्रहण करले आज इससे पावन कर दे हमें भी तू
   अर्पण करते है प्रभु
१. अपनी कलाकृति मुझपे उतार दे, जीवन सांस तूने मुझपे बहा दिया
   तेरे ही जीवन दान को तेरे ही चरणों में लाता हूँ
   तेरी अपार महिमा के खातिर, आज तुझे मैं समर्पित करता हूँ
२. तेरी ही माटी की उपज मैं लाता हूँ, हृदय रुपी घर मैं चढ़ाता हूँ
   तू तो प्रेम की बहती धारा, शीतल निर्मल सुकोमल है
   प्रेम की दो बूंद मुझमें बहा दो, यही है सब कुछ मेरे लिये प्रभु

This song is Derived from the Prabhu Upasana.

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