E59 Jo Ishwar Ne Khel Rachaya जो ईश्वर ने खेल रचाया
जो ईश्वर ने खेल रचाया, नभ ने उसका वैभव गाया
१. दिन-दिन में संदेश की धारा, रात में बहता ज्ञान है सारा
भाषण कुछ वह देता नहीं है, वाणी बिन आवाज रही है
२. नभ की वाणी फिर भी गुंजे, दसों दिशा में सारे जग में
रवि का डेरा एक क्षितिज पर, प्रभु की रचना है यह सुन्दर
This song is Derived from the Prabhu Upasana.
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